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उद्योगपतियों को MP की खूबियां बताएगी सरकार, वरिष्ठ अफसर देंगे प्रेजेंटेशन - Humara Mandsaur
Sun. Dec 15th, 2019

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उद्योगपतियों को MP की खूबियां बताएगी सरकार, वरिष्ठ अफसर देंगे प्रेजेंटेशन

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मैग्निफिसेंट एमपी में कमलनाथ सरकार उद्योगपतियों को प्रदेश की खूबियां बताएगी। वरिष्ठ अधिकारी सत्रों में प्रेजेंटेशन देंगे। इसमें क्षेत्रवार प्रदेश की स्थिति बताने के साथ यह भी बताया जाएगा कि सड़क, बिजली, पानी, जमीन और प्रशिक्षित मानव संसाधन हमारे यहां उपलब्ध है।

निवेश के लिए दोस्ताना माहौल है। उद्योग नीति, निवेश प्रोत्साहन सहित हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग नीतियां बनाई गई हैं, जो प्रदेश को दूसरे राज्य से अलग खड़ा करती हैं। वास्तविक सिंगल विंडो सिस्टम मौजूद है, जो सभी अनुमतियों को तेजी के साथ दिलाने में सहायक है।

उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों के लिए एक लाख 20 हजार एकड़ का लैंड बैंक मौजूद हैं। 20 हजार मेगावॉट बिजली की क्षमता और 900 एमसीएम पानी की उपलब्धता है। टेक्सटाइल, फूड, आईटी, गारमेंट जैसे पार्क हैं तो सड़क, रेल और वायु परिवहन सेवा का बेहतर नेटवर्क है।

उज्जैन, देवास, भोपाल, छिंदवाड़ा, बुरहानुपर, धार, खरगोन, खंडवा और ग्वालियर बड़े टेक्सटाइल के सेंटर हैं। 376 लाख मीट्रिक टन कपास की पैदावार है तो 103 लाख मीट्रिक टन सिल्क का उत्पादन है। 60 बड़ी टेक्सटाइल मिल हैं। पर्यटन के क्षेत्र की बात करें तो 11 नेशनल पार्क, छह टाइगर रिजर्व, तीन विश्व धरोहर स्थल (सांची, खजुराहो और भीमबैठिका)हैं। टाइगर स्टेट होने के साथ प्राकृतिक वातावरण लुभाता है।

टूरिज्म के क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए अलग से नीति बनाकर कई सुविधाएं भी दी गई हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए आईटी पॉलिसी बनाई गई है। 10 करोड़ रुपए का डाटा सेंटर में निवेश करने जमीन रियायती दर पर देने की नीति बनाई गई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर इस क्षेत्र के लिए चिन्हित हैं।

देश का 40 प्रतिशत जैविक उत्पाद मध्यप्रदेश में होता है। 11 जलवायु क्षेत्र होने से खेती विविधतापूर्ण है। 250 लाख हेक्टेयर खेती का क्षेत्र है। 20 लाख हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलों की खेती हो रही है तो 110 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि सिंचित है। 120 लाख हेक्टेयर में दो फसलें ली जाती हैं।

देश में दाल, चना, मिर्च, संतरा और तिलहन के उत्पादन में प्रदेश का पहला स्थान है। वहीं, दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश का पांचवां स्थान हैं। सोलर एनर्जी के क्षेत्र में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। साढ़े चार हजार मेगावॉट की परियोजनाएं जल्द शुरू होने वाली हैं। देश के केंद्र में होने की वजह से लॉजिस्टिक हब बनने के लिए सबसे उपयुक्त है।

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