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सरकार..! किसानों से यह कैसा व्यवहार - Humara Mandsaur
Mon. Oct 14th, 2019

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सरकार..! किसानों से यह कैसा व्यवहार

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एमपी अजब है यहां के कारनामे गजब है| जो कहीं नहीं होता वो मप्र में होता है| जी हाँ..बारिश से हुई बर्बादी का दुःख झेल रहे किसानों को अभी तक राहत के नाम पर भले ही सरकार से कुछ न मिला हो लेकिन अपनी फसलों के नुकसान का मुआवजा लेने के लिए उन्हें अपराधियों का जैसा व्यवहार जरूर झेलना पड़ा है| मामला विदिशा जिले से है, जहां किसानों के साथ खराब फसल के सर्वे के नाम पर कैदियों की तरह सलूक किया जा रहा है।  किसानों के गले में अपराधियों की तरह पट्टी बांध कर खराब फसल का सर्वे करवाया गया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं|  आमतौर पर अपराधियों की पहचान के लिए पुलिस ऐसा करती है। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए सरकार की घेराबंदी की है|

जानकारी के मुताबिक मामला विदिशा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर ग्यारसपुर से सटे मनोरा गाँव का है। जिले भर में बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है| यहां भी अतिवृष्टी से किसानों की फसले बर्बाद हो गई। जब फसल नुकसान का सर्वे करने प्रशासनिक दल किसानों के खेतों में पंहुचा तो सर्वे के नाम पर किसानों के हाथों में कैदियों की तरह स्लेट पकडा कर उनकी तस्वीर खिंचवाई गई। हालांकि इस स्लेट पर अपराध की जगह किसान का नाम, फसल का नाम, खसरा नंबर और जमीन के बारे में लिखा गया है। किसानों ने प्रशासन के इस कृत्य को अमानवीय मानते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

किसानों को ओर कितना अपमानित करेंगी सरकार 

इस मामले को लेकर सोमवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है| उन्होंने एक के बाद एक तीन ट्वीट कर मामले पर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए| उन्होंने लिखा है “विदिशा जिले के ग्यारसपुर से सटे मनोरा गाँव में कमलनाथ सरकार द्वारा किसानों के गले में अपराधियों की तरह पट्टी बांध कर खराब फसल का सर्वे करवाया जाना बेहद ही निंदनीय है। मैं प्रशासन के इस कृत्य की कड़े शब्दों में भर्सना करता हूँ। यह सरकार किसानों को ओर कितना अपमानित करेंगी? अतिवृष्टी से किसानों की फसले बर्बाद हो गई। पीड़ित किसानों को राहत देने के नाम पर सरकार उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक कर रही है। जो कि सरकार के अमानवीय चेहरे को उजागर करता है। उन्होंने आगे लिखा सर्वे के नाम पर किसानों के हाथों में कैदियों की तरह स्लेट पकडा कर उनकी तस्वीर खिंचवाई गई। फर्क इतना था कि इस स्लेट पर अपराध की जगह किसान का नाम, फसल का नाम, खसरा नंबर और जमीन के बारे में लिखा गया है। अन्नदाता के साथ खूंखार या लिस्टेड गुंडों जैसा सलूक किया जाना बेहद ही शर्मनाक है”|

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