रोजाना समाचार अपने मोबाइल पर पाने के लिए या कोई भी सुचना देने के लिए आपके सभी व्हाट्सप्प ग्रुप्स में हमारा नंबर 9893200664 जोड़े

पत्थर टकराने की आवाज आने से नाम पड़ गया खिड़की माता - Humara Mandsaur
Mon. Oct 14th, 2019

Humara Mandsaur

News & Mandi Bhav

पत्थर टकराने की आवाज आने से नाम पड़ गया खिड़की माता

1 min read
अपने सभी दोस्तों के शेयर करने के लिए निचे क्लिक करे

शहर के माता मंदिरों में बायपास के पास शिवना किनारे श्री खिड़की माता मंदिर पर शीतला सप्तमी पर तो श्रद्घालुओं का तांता लगता ही है। अभी नवरात्र में भी काफी भक्त यहां पहुंच रहे हैं। माताजी का मूल नाम श्री खड़कधारिणी माताजी है। इस स्थान पर दिनभर में कई बार दो पत्थर आपस में टकराने जैसी खड़-खड़ की आवाज आती रहती है और इसी कारण जगह का नाम खिड़की माता मंदिर हो गया। मंदिर के गर्भगृह के नीचे एक झरना भी बहता है जो सीधे शिवना नदी में मिलता है।

शिवना किनारे स्थित श्री खिड़की माता मंदिर लगभग 700-800 साल पुराना बताया जाता है। यहां के पुजारी दुर्गाप्रसाद परमार ने बताया कि मंदिर की वर्तमान जगह के पास ही स्थित बड़ का पेड़ में से माताजी के नौ पिंड स्वरूप निकले हैं और गर्भगृह में इन्हीं में से तीन की पूजा होती है। काफी समय के पहले तक बड़ के पेड़ के नीचे चरण पादुका भी दिखती थी। अभी मंदिर के नर्वनिर्माण के दौरान बड़ के आस-पास भराव डालने से वह दब सी गई है। गर्भगृह में माताजी के पिंड स्थापित है। इन्ही स्वरूप की पूजा प्रतिदिन हो रही है। पूरे नवरात्र में यहां जोत जलेगी। रविवार को ज्यादा श्रद्घालु पहुंच रहे हैं।

झरने के पानी से होते हैं चर्म रोग ठीक

पुजारी दुर्गाप्रसाद ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में माता की मूर्ति के ठीक नीचे झरना बह रहा है वह पास में ही शिवना नदी में मिलता है। नदी का जलस्तर बढ़ा होने से वह दिखता नहीं है। थोड़ा जलस्तर कम होने पर दिखने लगेगा। मान्यता है कि झरने के पानी से नहाने से दाद, खाज, खुजली सहित शरीर के घाव व अन्य चर्मरोग भी ठीक हो जाते हैं।

चार पीढ़ी से एक ही परिवार कर रहा है पूजा

दूर्गाप्रसाद परमार ने बताया कि हमारी चौथी पीढ़ी माताजी के मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। मेरे पड़दादाजी नंदाजी, दादाजी कालूरामजी, पिताजी रामनारायणजी के बाद अब में यहां प्रतिदिन पूजा कर रहा हूं। इसके अलावा जनकूपुरा निवासी मोहनलाल चौधरी भी 50 सालों से नियमित मंदिर पर आ रहे हैं। चौधरी ने मंदिर के चारों तरफ अथक मेहनत कर 100 से अधिक नीम के पेड़ बड़े कर दिए है।

मंदिर का चल रहा नवनिर्माण, पर्यटन विभाग ने किया काम

नदी किनारे सुरम्य व पर्यटन स्थल होने से यहां मप्र पर्यटन विकास निगम द्वारा भी आकर्षक छतरियां व अन्य निर्माण कराए गए है। इसके अलावा मंदिर समिति भी नवनिर्माण करने में लगी है। अभी मंदिर का निर्माण चल रहा है। शिखर कार्य बाकी है और कलश भी चढ़ना है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *