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पानी में डूबी फसलें, धूप भी नहीं मिल रही, उत्पादन की उम्मीदें हो रही ध्वस्त - Humara Mandsaur
Mon. Oct 14th, 2019

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पानी में डूबी फसलें, धूप भी नहीं मिल रही, उत्पादन की उम्मीदें हो रही ध्वस्त

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जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलों में भारी नुकसान हो रहा है। 27 जुलाई के बाद से जिलेभर के कि सी न कि सी क्षेत्र में प्रतिदिन बारिश हो रही है। बारिश के कारण अधिकांश खेतों में पानी भरा हुआ है। फसलें पानी में डूबी होने के कारण पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इसके कारण फसलों में अफलन की स्थिति है। जिन खेतों में फसलों में फलियां लगी भी तो अब लगातार हो रही बारिश से फलियां सड़ गई है। जिन खेतों में पानी नहीं भरा हुआ है, उन फसलों को प्रोटिन के लिए धूप की आवश्यकता है। धूप भी नहीं निकल रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएन मिश्रा ने बताया कि जिन खेतों में फसलें पानी में लगातार कई दिनों डूबी हुई हैं, उनमें 90 प्रतिशत तक नुकसान होने की संभावना है।

जिले में 3.32 लाख हेक्टेयर भूमि पर खरीफ की बोवनी कि सानों ने की है। इसमें सर्वाधिक ढाई लाख हेक्टेयर भूमि पर सोयाबीन की बोवनी हुई है। लेकि न बारिश ने कि सानों की सभी उम्मीदों को तबाह कर दिया है। खेतों में पानी भरा होने के कारण कई दिनों फसलें डूबी हुई है। हालात यह है कि कि सान अपने ही खेतों में नहीं जा पा रहे है। अतिवृष्टि के कारण जिलेभर के खेतों में खड़ी फसलों के हालात बहुत बुरे हैं। खेत पानी से भरे हुए हैं, फसलें पानी के कारण पीली हो गई है। निचले क्षेत्रों के खेतों में तालाब सी स्थिति बनी हुई है। पिछले कु छ दिनों से हो रही झमाझम बारिश ने कि सानों की आफत को और बढ़ती जा रही है। कि सान खेतों से पानी की निकासी भी नहीं कर पा रहे हैं। जिन खेतों में लगातार पानी भरा हुआ है वहां फसलें गल गई है।

फसलों को धूप की जरूरत पर पानी नहीं हो बंद

 

 

 

 

जिलेभर में एक समान स्थिति है। सभी दूर बारिश का दौर चल रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएन मिश्रा ने बताया कि जिलेभर में खेतों में फसलें पानी में डूबी होने के कारण अफलन की स्थिति बनी है। कई-कई दिनों से फसलों को धूप नहीं मिल पा रही है। जबकि फसलों को धूप की जरूरत है, जिससे फलियों को प्रोटिन मिले और फिर दाना बन सके । ऐसी ही स्थिति रही तो दाना छोटा बनेगा। फसलों में कम से कम 25 से 75 प्रतिशत तक नुकसान हो गया है। फसलें लगातार भीगने के कारण पीली हो गई है। इस कारण उत्पादन भी प्रभावित होगा।

 

 

कोटड़ाबुजुर्ग। बारिश के कारण कोटडाबुजुर्ग व आसपास क्षेत्र के खेतों में पानी भरा है। इस कारण सोयाबीन, मक्का, उडद, टमाटर, मिर्ची आदि फसलें तबाह होने की कगार पर है। कि सान कि शोर पाटीदार, शंकरलाल शर्मा ने बताया कि मक्का, सोयाबीन सहित लगभग सभी फसले बारिश के कारण गल गई है। खेतों में पानी भरा होने के कारण हम खेतों में जा भी नहीं पा रहे है। कि सानों को बहुत नुकसान हुआ है। सर्वे कर कि सानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

फसलें नष्ट हो गई, कें ध सरकार से कि सानों को विशेष राहत पैके ज देने की मांग

मंदसौर। जिले में सर्वाधिक वर्षा होने से खरीब की प्रमुख फसल सोयाबीन, उड़द, मक्का सहित प्याज की फसलें पूरी तरह से नष्ट होने से कि सानों को भारी नुकसान हुआ है। मप्र कांग्रेस कमेटी महामंत्री महेंधसिंह गुर्जर इस अतिवृष्टि को लेकर प्रधानमंत्री नरेंध मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की है कि इस प्राकृतिक आपदा में कि सानों की फसलें शत-प्रतिशत नष्ट होने से कि सानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। कि सानों के पास अपने पशुओं को खिलाने के लिए भी पर्याप्त चारा नहीं होने से संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में कें ध सरकार मध्यप्रदेश के कि सानों को विशेष राहत पैके ज दे। गुर्जर ने कहा कि कि सानों को आगामी एक साल जब तक रबी की फसलें पककर तैयार नहीं हो जाती तब तक अपनी खेती और घर संचालन करने में भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

 

फसलें हो रही प्रभावित

लगातार हो रही बारिश के कारण फसलें प्रभावित हो रही है। खेतों पानी भरा होने से 25 प्रतिशत फसलें पीली पड़ गई है। इस कारण उन पौधों में जितनी फली बनना चाहिए उतनी नहीं बन पा रही है। जहां पानी भरा हुआ है वहां अफलन की स्थिति है। जो फसलें कई दिनों से डूबी हुई है उसमें 90 प्रतिशत तक नुकसान है। अतिवृष्टि के कारण उत्पादन प्रभावित होगा। फसलों को धूप की जरुरत है।

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