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इंद्रियों को काबू में करके प्राप्त होते हैं आत्मस्वरूप प्रभु के दर्शन - Humara Mandsaur
Sun. Sep 22nd, 2019

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इंद्रियों को काबू में करके प्राप्त होते हैं आत्मस्वरूप प्रभु के दर्शन

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मनुष्य आत्मज्ञान प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त कर सकता है, किंतु मोक्ष प्राप्ति में मुनष्य शरीर में विद्यमान इंद्रियां रुकावट बनती है। जो गुरु से आत्मज्ञान प्राप्त हुआ है इंद्रियों के वश में होने के कारण उस ज्ञान को आत्मसात नहीं कर पाते हैं। सांसारिक मोहमाया के पाश में बंधा रहता है। इससे बचने के लिए उससे सबसे पहले इंद्रियों को काबू में करना होगा। इससे वह आत्मा में विराजमान प्रभु को पहचान पाएगा।

यह बात संत श्री चैतन्यानंदगिरीजी महाराज ने कही। वे केशव सत्संग भवन में चातुर्मास के दौरान चल रहे दिव्य आध्यात्मिक सत्संग में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इसके लिए वेदों में लिखा है कि जो मनुष्य नित्य कर्म करता है वह अपनी इंद्रियों को काबू में कर लेता है तो इस आधार पर उसको मुक्ति मिलती है, क्योंकि मनुष्य जीवन अनमोल है। इंद्रियां ही है जो उसे मोह-माया, काम, क्रोध, धन के पाश में फंसाकर विवेकहीन बना देती है। किंतु मनुष्य आत्मज्ञान प्राप्त करके अपने द्वारा किए गए अच्छे-बुरे कर्मों को पहचान सकता है। किंतु विवेकहीन व्यक्ति सांसारिक मोहमाया के जाल में रहते हुए सत्य कर्म नहीं कर पाता है। बस वह मोक्ष की कामना करता है इसीलिए उससे कितना भी आत्मज्ञान का उपदेश दे दो। पर वो मनुष्य कभी आत्मज्ञान ग्रहण नहीं कर सकता है। इसके चलते उससे सांसारिक जीवन से कभी मुक्ति नहीं मिलती है। सत्संग भवन ट्रस्ट पदाधिकारी जगदीशचंद्र सेठिया, कारूलाल

सोनी, प्रहलाद काबरा, राधेश्याम गर्ग, नंदलाल गुप्ता, सत्यनारायण गर्ग, मदनकुमार गेहलोद, जयप्रकाश गर्ग, संतोष जोशी, प्रवीण देवड़ा, शिवनारायण शर्मा, मांगीलाल सोनी, रविंद्र पांडे, श्यामसुंदर चौधरी, नीरज गेहलोत, विश्वनाथ शर्मा, कन्हैयालाल पांडिया सहित समस्त सत्संग भवन ट्रस्ट के सभी सदस्य व श्रद्घालु मौजूद थे।

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