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वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सोयाबीन अनुसंधान संस्थान द्वारा किसानों को सलाह जारी - Humara Mandsaur
Sun. Sep 22nd, 2019

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News & Mandi Bhav

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सोयाबीन अनुसंधान संस्थान द्वारा किसानों को सलाह जारी

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उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने जानकारी दी कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इन्दौर द्वारा जिले के किसानों को आवश्यक सलाह जारी की गई है। उल्लेखनीय है कि कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन फसल पर सेमिलुपर, तंबाखू की इल्ली और चने की इल्ली का प्रकोप होने के समाचार मिले हैं। इनके प्रबंधन के लिये क्विनालफॉस 25 ईसी 1500 मिली/हेक्टे., इंडोक्साकार्ब 14.5एससी 300 मिली/हेक्टे., फ्लुबेंडियामाईड 39.35 एससी 150 मिली/हेक्टे.,फ्लुबेंडियामाईड 20 डब्ल्यूजी 250-300मिली/हेक्टे. अथवा स्पायनोटेरम11.7 एससी 450 मिली/हेक्टे. में से किसी भी एक कीटनाशक का छिड़काव किया जाये। कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों के साथ-साथ सफेद मक्खी का भी प्रकोप देखा गया है। इनके नियंत्रण के लिये पूर्वमिश्रित कीटनाशक बीटासाइफ्लुथ्रिन और इमिडाक्लोप्रिड 350 मिली/हेक्टे. अथवा थाइमिथॉक्सम+लेमडासायहैलोथ्रिन 125 मिली/हेक्टे. की दर से छिड़काव करने की सलाह दी जाती है,जिससे कि तना मक्खी का भी नियंत्रण हो। कुछ क्षेत्रों में सोया- बीन की फसल में माइरोथिसियम लीफस्पॉट, इंथ्रेकनोज, एरियल ब्लाईट और चारकोल रॉट बीमारी का प्रकोप देखा गया है।इसके नियंत्रण के लिये किसानों को सलाह दी जाती है,कि फसल पर टेबुकोना- झोल625 मिली/हेक्टे.,टेबुकोनाझोल और सल्फर एककिग्रा/हेक्टे., हेक्जा कोनाझोल 500 मिली/हेक्टे.या पाइरो- क्लो स्ट्रोबिन 500 ग्रा/हेक्टे. को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जिन स्थानों पर गर्डल बिटल का प्रकोप शुरू हो गया हो, वहां पर थाईक्लोप्रिड 21.7 एससी 650 मिली/हेक्टे., प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1.25 ली/हेक्टे. अथवा ट्राइजोफॉस 40 ईसी 800 मिली/हेक्ट की दर से छिड़काव करें। पीला मोजाइक बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिये खेत में यलो स्टीकी ट्रेप का प्रयोग करें,जिससे मक्खी के वयस्क नष्ट किये जा सकें।साथ ही पीला मोजाइक रोग से ग्रसित पौधों/अवशेषों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें।रोग की तीव्रता अधिक होने पर थायोमि- थाक्सम 25 डब्ल्यूजी 100 ग्रा/500 लीटर पानी का ‍छिड़काव करें। सोयाबीन फसल में चूहों से नुकसान की जानकारी भी प्राप्त हो रही है।अत:चूहों के प्रबंधन के लिये आटे अथवा ज्वार के बीज को जिंक फास्फाईड पावडर के साथ मिलाकर अथवा बाजार में उपलब्ध एंटीकोवागुवेंट बिस्किट का उपयोग करें। बुवाई के समय संतुलित पोषण का उपयोग न करने पर फसल कमजोर एवं पीली हो जाती है।जिसमें कीट एवं बीमारियों का प्रकोप अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में संतुलित पोषण के लिये एनपीके 19:19:19 का दो%घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। बीज उत्पादन के लिये उगाई जाने वाली सोयाबीन की फसल में पत्तियों, फूल का रंग और रोंए के रंग के आधार पर अन्य किस्मों के पौधों को निकाल दें!जिससे बीज की शुद्धता बनी रहे। लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति होने पर अतिरिक्त पानी के निकास के लिये नालियों की व्यवस्था की जाये।अधिक जानकारी के लिये स्थानीय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय या सम्बन्धित क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क किया जा सकता है।

Neemuch Mandi bhav 4/9/2019


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