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हिमालय की बर्फबारी से, अब 27 के बाद होगी जिले में तेज बारिश

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हिमालय की बर्फबारी के चलते ठंडी हवाओं को दौर चला, गर्म हवा ठंडक में बदल गई, इससे स्थानीय मानसून राजस्थान की तरपऊ चला गया। अब अंचल में 27 के बाद अच्छी बारिश हो सकेगी।

कुओं व नलकूपों का फिलहाल जलस्तर सामान्य से कम है। किसानों को सिंचाई करना मुश्किल हो गया है। सोयाबीन व प्याज की रोपण के पौधे फिलहाल सूक्ष्म अवस्था में है। इन्हें कुएं के पानी से सिंचित किया जाता है तो केवल नमी बनी रहेगी, पौधों की ग्रोथ पर असर नहीं होगा। कृषि विभाग के मुताबिक जिलेभर में करीब 3 लाख हेक्टेयर से अधिक में खरीफ सीजन की बोवनी हुई है। इसमें 1 लाख 70 से अधिक हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी है। बारिश के 18 दिनों की खेंच व 34 डिग्री से अधिक तापमान होने से फसलें मुरझाने व सूखने लगी है। पथरीली जमीनों के साथ ही सिंचित कृषि भूमि पर सोयाबीन व मक्का फसल के भी यही हाल है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन मिश्रा ने बताया बारिश का पखवाड़ा 27 के बाद ही शुरू होगा, रिमझिम बारिश होती रहेगी।

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किसान हाइड्रोजन का छिड़काव कर चलाए कोलपा-कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस चुंडावत ने बताया कि बारिश की खेंच के चलते फसल मुरझाने की स्थिति में है तो प्रति हेक्टेयर 5 किलो की दर से हाइड्रोजन का छिड़काव कंरे। छिड़काव वार्मिंग कम्पोस्ट या खाद में मिलाकर ही करें। इसके बाद खेत में कोलपा चलाए ताकि पानी का कटाव होगा, इससे पौधों में नमी बनी रहेगी। जिन किसानों के यहां सिंचाई की सुविधा हो वे माइक्रो स्प्रिंकलर से हल्की जीवन रक्षक सिंचाई करें। जो पौधे मुरझा रहे हैं उनके ऊपर 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करें।

 

 

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