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मक्का फसल पर फॉल आर्मी कीट का प्रकोप, तने में अंडे देकर कर रहा नष्ट

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खरीब सीजन की मक्का फसल में फॉल आर्मी वर्म नाम के कीड़ा का प्रकोप होने लगा है। यह मक्का की फसल में मुख्य रूप से तने में घुसकर अंडे देकर फसल को नष्ट कर रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक व कृषि मित्र किसानों के खेत में जाकर उन्हें कीड़े के बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही इसकी रोकथाम के उपाय भी बताए जा रहे हैं। शनिवार को धुंधड़का क्षेत्र के किसानों को जानकारी देने के लिए कृषि विस्तारक अधिकारी बीएल पाटीदार पहुंचे। उन्होंने किसानों को दवाई का छिड़काव करके फसल को कैसे बचाया जा सके, यह बताया। इसी तरह कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस चुंडावत व उनकी टीम भी कॉल सेंटर के माध्यम से व मौके पर जाकर किसानों की समस्याओं का निराकरण कर रही है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस चुंडावत ने बताया फाॅल आर्मी वर्म कीट का वैज्ञानिक नाम स्पोडोप्टेरा फ्यूजीपरडा है तथा यह लेपीडोप्टेरा गण एवं नाॅक्टुइडी परिवार से संबंधित है। यह एक बहुभक्षी कीट है, जो 80 से अधिक प्रकार की फसलों पर नुकसान करता है। मक्का सबसे पसंदीदा फसल है। इस कीट के पतंगे हवा के साथ एक रात में करीब 10 किमी तक प्रवास कर सकते हैं। मादा अपने जीवनकाल में करीब 1 हजार तक अंडे दे सकती है। यह कीट झुंड में आक्रमण कर पूरी फसल को कुछ ही समय में नष्ट करने की क्षमता रखते हैं।

इस तरह से करें बचाव

फसल के अंकुरण के 30 दिनों के भीतर पक्षियों के बैठने के लिए अंग्रेजी के टी आकृति के बर्ड पर्च 10 प्रति एकड़ की दर से जमीन में खड़े करें। पांच लाइट ट्रैप प्रति हैक्टेयर की दर से लगाएं। प्रत्येक पौधों की पेंगली (पोटा) में रेत एवं चूने को 9ः1 के अनुपात में मिश्रण कर डालें। इस कीट के लिए फ्यूजीपरडा फेरोमोन ट्रैप 15 प्रति हैक्टेयर की दर से खेत में स्थापित कर नर शलभ (फुंदियों) को बड़े पैमाने पर फंसाकर नष्ट करें। बेसिलस थुरिंएजनसीस (बीटी) की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर या 400 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ की दर से भी उपयोग किया जा सकता है। यदि फसल को 10 से 20 प्रतिशत की हानि हो रही हो तो इल्ली की दूसरी और तीसरी अवस्था को नियंत्रण करने के लिए स्पाईनिटोेरम 11.7 प्रतिशत एससी की 0.3 मिली, ईमामेक्टीन बैंजोएट 0.4 ग्राम या स्पाईनोसैड 0.3 मि.ली. मात्रा या थाईमिथोक्जाम 12.6: $ लेमडा-साईहेलोथ्रिन 9.5ः की 0.5 मिली या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5ः एससी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर के छिड़काव करें।

चुंडावत व उनकी टीम किसानों को दे रही जानकारी।

आप भी जानिए पहचान व लक्षण

अंडा – अंडे गोलाकार होते हैं तथा इनका आकार (0.75 मिमी व्यास) के होते हैं। ताजा दिए हुए अंडों का रंग हरा होता है व अंडे फूटने से पहले हल्के भूरे रंग के हो जाते हैं। अंडे की परिपक्वता अवधि 2-3 दिन (20-30 डिग्री सेल्सियस) रहती है। अंडे आमतौर पर करीब 150-200 अंडों के समूह में पत्ती की सतह पर दो से चार परतों में दिए जाते हैं। अंड समूह आमतौर पर मादा के पेट के धुसर-गुलाबी रंग के बालों के द्वारा ढंककर सुरक्षित कर देती है। ताकि उसको प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक कारकों से बचाया जा सके।

शंखी अवस्था (प्यूपा) – नर प्यूपा की लंबाई 1.3-1.5 सेंटीमीटर जबकि मादा प्यूपा की लंबाई 1.6-1.7 सेमी होती है। साथ ही ये चमकदार भूरे रंग के होते हैं।

इल्ली (लार्वा) – इल्ली हल्के हरे से गहरे भूरे रंग की होती है तथा उसके पीठ पर लंबाई में धारियां पाई जाती हैं। इल्ली की छठी अवस्था 3-4 सेमी लंबाई की होती है। इल्ली के उदर पर 8 जोड़ी पैर पाए जाते हैं। उदर के अंतिम खंड पर भी एक जोड़ी उदरीय पैर पाए जाते हैं। नवजात इल्ली के हरे शरीर पर काली रेखाएं एवं धब्बे होते हैं। इल्ली का रंग वृद्धि के साथ भूरे रंग की हो जाती है तथा शरीर पर काली पृष्ठीय और गोलाकार रेखाएं बनने लगती हैं। अंतिम अवस्था अपने आर्मी वॉर्म चरण में लगभग काला हो जाता है। बड़े लार्वा के सिर पर पीले रंग का एक उल्टे एल-आकृति का चिन्ह होता हैं। आमतौर पर छह लार्वा अवस्था होती हैं, कभी-कभी पांच।

समाचार जारी ...

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