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हादसों में मौत के बाद भी नगर पालिका का रवैया सुस्तीभरा

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मंदसौर में लगभग एक दर्जन से अधिक मकान जर्जर हालत में हैं। बारिश शुरू होते ही इन मकानों से मिट्टी और पत्थर गिर रहे हैं, लेकि न नगर पालिका इस मामले में गंभीर नहीं है। नोटिस थमाने के अलावा कु छ नहीं हो रहा। चार साल पहले चि-ति 36 जर्जर मकानों को भी नपा गिरवा नहीं सकी है। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक मकान जर्जर हालत में हैं। ये मकान शहर के कोलगर गली, शहर किला रोड, जनकु पुरा, राम मोहल्ला, तुलसीदास गली, नजमपुरा, तैयबपुरा, नरसिंहपुरा, श्रृंगार गली आदि क्षेत्र में हैं। जिले में ऐसे मकानों की संख्या 25 से अधिक है। नगर पालिका जर्जर मकानों को हटाने की कार्रवाई करने की जगह आंकड़ों की जादूगरी और नोटिस का खेल रही है। 2015 में 36 मकान शहर में जर्जर थे। 2016 में 28 मकान रह गए, 2017 में ऐसे मकानों की संख्या कम जरूर हुई लेकि न हादसो का भय खत्म नहीं हुआ। कई ऊंची इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं इसी महीने चार जुलाई को बारिश के दौरान राम मोहल्ले में एक जर्जर मकान की दीवार गिरी थी। इसके अलावा बारिश के बाद कच्चे मकान की दीवार गिरने से नारायणगढ़ और शामगढ़ में दो बालिकाओं की मौत भी एक सप्ताह में हो चुकी है। मंदसौर में नाहर सैयद रोड पर एक कच्चे मकान की भी दीवार भी गिर चुकी है। इसके अलावा 2014 में बारिश में नयापुरा रोड पर एक जर्जर मकान का छज्जा गिरने से मजदूर घायल हो गया था। कु छ साल पहले सम्राट मार्ग पर एक मकान ढहने से महिला की मौत हो चुकी है। दो साल पहले बोहरा बाखल में भी एक मकान गिर गया था, हालांकि जनहानि नहीं हुई थी। तुलसीदास गली में दो वर्ष पहले जर्जर मकान की दीवार ढह चुकी है। नगर पालिका सीएमओ ओपी मिश्रा का कहना है कि जर्जर मकानों के बारे में हमें जानकारी नहीं है।

समाचार जारी ...

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