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खाद का भंडारण कर सरकारी मूल्य तय, 18 हजार क्विं. सोयाबीन बीज का किया स्टॉक - Humara Mandsaur
Sun. Sep 22nd, 2019

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खाद का भंडारण कर सरकारी मूल्य तय, 18 हजार क्विं. सोयाबीन बीज का किया स्टॉक

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जिले में प्री-मानसून के दस्तक देने के बाद जहां किसानों ने खरीफ सीजन के लिए खेतों की जुताई शुरू कर दी है। वहीं कृषि विभाग ने भी खरीफ सीजन से पहले फसल के रकबे अनुसार बीज की उपलब्धता व खाद का स्टॉक निर्धारित कर लिया है।

जिले में 3 लाख 29 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई होना है। इसमें अधिकतम रकबा 2 लाख 35 हजार के करीब सोयाबीन का है। इधर, किसानों को खाद के लिए परेशानी नहीं हो इससे पहले विभाग ने सभी सोसायटियों में अग्रिम भंडारण करवा दिया है ताकि समय पर दी जा सके।

उपसंचालक कृषि डॉ. अजीतसिंह राठौर ने बताया कि हर साल खरीफ सीजन के पूर्व ही विभाग खाद-बीज का स्टॉक निर्धारित रकबे के अनुसार कर लेता है। खरीफ सीजन के समय अंचल में प्रमुख रूप से सोयाबीन, मक्का, उडद, मूंग, अरहर, मूंगफली फसलें बोई जाती हैं। इनमें 2019 के लिए विभाग ने साेयाबीन का रकबा 2 लाख 35 हजार, मक्का का 35 हजार, उड़द का 47 हजार, मूंग का 3 हजार, अरहर 3 हजार, मूंगफली का 4 हजार निर्धारित किया है।

इसी रकबे के मुताबिक किसानों को बोवनी से पहले यानी 31 मई तक सोसायटियों में खाद की उपलब्धता करवा दी है। इनमें यूरिया 9647 मीट्रिक टन, डीएपी 6656 मीट्रिक टन, कांप्लेक्स 10 हजार मीट्रिक टन व पोटाश 542 मीट्रिक टन है। वहीं बीज की उपलब्धता बात की जाय तो सोयाबीन बीज का स्टाॅक बीज निगम ने 2400 क्विंटल कर रखा हैं। साथ ही बीज उत्पादक संस्थाओं के पास 15 हजार 700 क्विंटल का पर्याप्त स्टॉक है। विभाग 300 क्विंटल हाइब्रिड मक्का का वितरण किसानों को कर चुका है।

कर्जमाफी में फंसा पेंच, नहीं मिल रहा खाद

प्रदेश सरकार की जय किसान कर्जमाफी योजना में अब तक पेंच फंसा हुआ है। किसानों को कर्जमाफी के प्रमाण-पत्र मिलने के बाद एक तरफ उन्हें नोड्यूज तक दिए जा चुके हैं। वहीं सोसायटियां खाद देने में आनाकानी कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों का कर्ज 31 मार्च 2018 तक का हुआ है लेकिन किसान 12 दिसंबर 2019 तक कर्जमाफी होना बता रहे हैं। योजना में 31 मार्च 2018 से लेकर12 दिसंबर 2019 तक ब्याज भरने का प्रावधान है।

इधर, बाजार व सोसायटियों में खाद के दामों में अंतर

खाद सोसायटी बाजार

यूरिया 267 275

डीएपी 1400 1350

पोटास 945 900

भाव प्रति बाेरी 50 किलाे के हिसाब से।

उपसंचालक कृषि डॉ. ए.एस. राठौर ने बताया कि विभाग अपने स्तर पर खाद-बीज की दुकानों का निरीक्षण कर सैंपल लेता है। फिर भी किसानों को खाद, बीज व दवाइयों का पक्का बिल लेना चाहिए। ताकि किसी प्रकार से फसल को नुकसान पहुंचने पर संबंधित विक्रेता या फर्म पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके अभाव में किसान ही परेशान होते हैं।

खाद-बीज सामग्री का पक्का बिल जरूर लें

डीएपी के दाम सोसायटी में ज्यादा, बाजार में 50 रुपए कम यानी माल में घपला, गुणवत्ता में हो सकती है कमी

सहकारी सोसायटियों से मिलने वाले खाद के दाम शासन ने तय तो कर दिए हैं। सोसायटी में डीएपी के दाम 1400 रुपए हैं, वहीं बाजार मूल्य 1350 है। भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष भगवानसिंह शक्तावत के मुताबिक 50 रुपए का अंतर होने से माल में घपले की आशंका है। वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोसायटी में खाद के दाम फिक्स होते है। बाजार में कई तरह की वैरायटियां होती हैं। हालांकि 50 रुपए कम भाव में बेचे जाने पर गुणवत्ता की कमी हो सकती है। इसे लेकर दुकानों पर जाकर डीएपी सहित अन्य खाद की जांच की जाएगी।

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